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श्री हनुमान स्तोत्रम्: संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ, महत्व और लाभ

Shital Shelke
Shital Shelke

Sep 15, 2026 · 1 min read · 59 views

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श्री हनुमान स्तोत्रम्: संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ, महत्व और लाभ

॥ श्री हनुमते नमः ॥


भगवान हनुमान जी को शक्ति, साहस, बुद्धि, भक्ति और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना जाता है। वे भगवान श्रीराम के परम भक्त और रामायण के प्रमुख पात्रों में से एक हैं।


श्री हनुमान स्तोत्रम् भगवान हनुमान जी की शक्ति, वीरता, पराक्रम और श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति का स्मरण कराने वाला भक्तिपूर्ण स्तोत्र है।


इस स्तोत्र में हनुमान जी के जन्म, उनकी अपार शक्ति, समुद्र लांघने, माता सीता की खोज, लंका दहन और लक्ष्मण जी की रक्षा जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का स्मरण किया गया है।


श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान स्तोत्र का पाठ करने की धार्मिक परंपरा है।


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॥ श्री हनुमान स्तोत्रम् ॥


अञ्जनीगर्भसम्भूतं

कपीन्द्रसचिवोत्तमम्।

रामप्रियं नमस्यामि

हनूमन्तं महाबलम्॥


महाशैलं समुत्पाट्य

धावन्तं रावणालये।

लङ्कां भस्मीकृतां येन

तं वन्दे हनुमन्तम्॥


सागरं लङ्घयित्वा यो

गत्वा लङ्कां महाबलः।

सीतां दृष्ट्वा महाभागः

तं वन्दे हनुमन्तम्॥


अक्षादीन् राक्षसान् हत्वा

लङ्कां दग्ध्वा च वीर्यवान्।

सीतामाश्वास्य रामस्य

दूतत्वं कृतवान् कपिः॥


येन मेरुं समुत्पाट्य

गत्वा सौमित्रिरक्षणे।

आनीता औषधिः शीघ्रं

तं वन्दे हनुमन्तम्॥


येन लङ्कां समुत्पाट्य

रावणं सपरिच्छदम्।

हतं रामस्य कार्यार्थं

तं वन्दे हनुमन्तम्॥


येन रामस्य कार्यार्थं

सागरं लङ्घितं कपिः।

तं वन्दे पवनात्मानं

हनूमन्तं महाबलम्॥


॥ श्री हनुमते नमः ॥


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हनुमान स्तोत्र का सरल अर्थ


अब हनुमान स्तोत्र की प्रत्येक पंक्ति का सरल हिंदी अर्थ समझते हैं।


अञ्जनीगर्भसम्भूतं


सरल अर्थ:

हे हनुमान जी, आप माता अंजनी के गर्भ से जन्मे हैं।


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कपीन्द्रसचिवोत्तमम्।


सरल अर्थ:

आप वानरराज सुग्रीव के श्रेष्ठ और विश्वासपात्र मंत्री थे।


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रामप्रियं नमस्यामि


सरल अर्थ:

मैं भगवान श्रीराम के प्रिय भक्त हनुमान जी को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ।


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हनूमन्तं महाबलम्॥


सरल अर्थ:

मैं महान शक्ति और अपार पराक्रम वाले हनुमान जी को प्रणाम करता हूँ।


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महाशैलं समुत्पाट्य


सरल अर्थ:

आपने अपनी अद्भुत शक्ति से विशाल पर्वत को उठा लिया था।


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धावन्तं रावणालये।


सरल अर्थ:

भगवान श्रीराम के कार्य के लिए आप तेजी से लंका की ओर गए।


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लङ्कां भस्मीकृतां येन


सरल अर्थ:

आपने अपने अद्भुत पराक्रम से लंका को अग्नि से जला दिया।


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तं वन्दे हनुमन्तम्॥


सरल अर्थ:

ऐसे वीर और पराक्रमी हनुमान जी को मैं श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूँ।


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सागरं लङ्घयित्वा यो


सरल अर्थ:

आपने विशाल समुद्र को पार किया।


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गत्वा लङ्कां महाबलः।


सरल अर्थ:

अपनी अपार शक्ति के बल पर आप लंका पहुँचे।


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सीतां दृष्ट्वा महाभागः


सरल अर्थ:

आपने लंका में माता सीता को खोज लिया और उनके दर्शन किए।


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तं वन्दे हनुमन्तम्॥


सरल अर्थ:

ऐसे महान और पराक्रमी हनुमान जी को मैं श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ।


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अक्षादीन् राक्षसान् हत्वा


सरल अर्थ:

आपने अक्षय कुमार सहित अनेक राक्षसों का सामना किया और उनका वध किया।


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लङ्कां दग्ध्वा च वीर्यवान्।


सरल अर्थ:

आपने अपने अद्भुत साहस और पराक्रम से लंका को जला दिया।


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सीतामाश्वास्य रामस्य


सरल अर्थ:

आपने माता सीता को भगवान श्रीराम के आने और उन्हें मुक्त कराने का विश्वास दिलाया।


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दूतत्वं कृतवान् कपिः॥


सरल अर्थ:

आपने भगवान श्रीराम के सच्चे दूत के रूप में अपना कर्तव्य पूरा किया।


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येन मेरुं समुत्पाट्य


सरल अर्थ:

आपकी शक्ति इतनी महान थी कि आप विशाल पर्वत को भी उठा सकते थे।


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गत्वा सौमित्रिरक्षणे।


सरल अर्थ:

लक्ष्मण जी की रक्षा के लिए आप औषधि लाने के लिए तुरंत निकल पड़े।


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आनीता औषधिः शीघ्रं


सरल अर्थ:

आप शीघ्रता से जीवनदायिनी औषधि लेकर आए।


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तं वन्दे हनुमन्तम्॥


सरल अर्थ:

लक्ष्मण जी की रक्षा करने वाले हनुमान जी को मैं श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूँ।


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येन लङ्कां समुत्पाट्य


सरल अर्थ:

आपने भगवान श्रीराम के कार्य को पूरा करने के लिए लंका में अपना अद्भुत पराक्रम दिखाया।


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रावणं सपरिच्छदम्।


सरल अर्थ:

आपने रावण और उसकी विशाल राक्षस सेना का सामना किया।


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हतं रामस्य कार्यार्थं


सरल अर्थ:

आपके सभी कार्य भगवान श्रीराम के उद्देश्य और धर्म की स्थापना के लिए समर्पित थे।


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तं वन्दे हनुमन्तम्॥


सरल अर्थ:

भगवान श्रीराम के महान सेवक हनुमान जी को मैं श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ।


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येन रामस्य कार्यार्थं


सरल अर्थ:

आपने भगवान श्रीराम के कार्य को अपना सर्वोच्च कर्तव्य माना।


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सागरं लङ्घितं कपिः।


सरल अर्थ:

आपने श्रीराम के कार्य के लिए विशाल समुद्र को पार किया।


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तं वन्दे पवनात्मानं


सरल अर्थ:

मैं पवनदेव के पुत्र हनुमान जी को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूँ।


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हनूमन्तं महाबलम्॥


सरल अर्थ:

मैं महान शक्ति, साहस और पराक्रम के प्रतीक हनुमान जी को नमन करता हूँ।


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हनुमान स्तोत्र का महत्व


हनुमान स्तोत्र भगवान हनुमान जी के अद्भुत चरित्र और उनके पराक्रम का स्मरण कराता है। इसमें हनुमान जी द्वारा भगवान श्रीराम के लिए किए गए महत्वपूर्ण कार्यों का वर्णन मिलता है।


हनुमान जी ने अपनी शक्ति का उपयोग कभी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं किया। उन्होंने अपनी पूरी क्षमता भगवान श्रीराम की सेवा में समर्पित कर दी।


इसी कारण वे भक्ति, सेवा, साहस, अनुशासन और समर्पण के आदर्श माने जाते हैं।


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हनुमान स्तोत्र पढ़ने के लाभ


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और विश्वास से हनुमान स्तोत्र का पाठ करने से:


- मन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है।

- भय और नकारात्मक विचारों से दूर रहने में सहायता मिलती है।

- कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।

- भगवान हनुमान जी के प्रति भक्ति और श्रद्धा बढ़ती है।

- मन को शांति और सकारात्मकता प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

- व्यक्ति को निस्वार्थ सेवा और अच्छे कर्मों की प्रेरणा मिलती है।


इन लाभों को धार्मिक एवं आध्यात्मिक मान्यताओं के रूप में समझना चाहिए।


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हनुमान स्तोत्र का पाठ कब करें?


हनुमान स्तोत्र का पाठ किसी भी दिन श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है।


विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा और स्तोत्र पाठ की परंपरा है।


सुबह स्नान के बाद या शाम को शांत वातावरण में बैठकर स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है।


पाठ करते समय मन को शांत रखना और भगवान हनुमान जी का ध्यान करना भक्तिपूर्ण पाठ का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।


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हनुमान स्तोत्र का पाठ कैसे करें?


1. सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

2. शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठें।

3. भगवान हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जला सकते हैं।

4. कुछ क्षण आंखें बंद करके हनुमान जी का ध्यान करें।

5. श्रद्धा और एकाग्रता के साथ हनुमान स्तोत्र का पाठ करें।

6. पाठ के बाद भगवान हनुमान जी से शक्ति, बुद्धि और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।


सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाठ श्रद्धा और सकारात्मक भाव से किया जाए।


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हनुमान स्तोत्र से मिलने वाली सीख


साहस


हनुमान जी ने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपना साहस नहीं छोड़ा।


भक्ति


उनकी भगवान श्रीराम के प्रति भक्ति पूर्ण और निस्वार्थ थी।


सेवा


उन्होंने अपने जीवन को श्रीराम की सेवा के लिए समर्पित किया।


विनम्रता


अपार शक्ति होने के बावजूद हनुमान जी अहंकार से दूर रहे।


समर्पण


उन्होंने अपने प्रत्येक कार्य को भगवान श्रीराम की सेवा माना।


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हनुमान जी को महाबली क्यों कहा जाता है?


हनुमान जी को महाबली इसलिए कहा जाता है क्योंकि उनके पास असाधारण शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति थी। समुद्र लांघना, लंका में प्रवेश करना और लक्ष्मण जी के लिए औषधि लाना उनके अद्भुत पराक्रम के उदाहरण हैं।


लेकिन हनुमान जी की सबसे बड़ी शक्ति केवल उनका शारीरिक बल नहीं था। उनकी बुद्धि, भक्ति, साहस और आत्मविश्वास भी उनकी महान शक्तियां थीं।


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हनुमान स्तोत्र का मुख्य संदेश


हनुमान स्तोत्र हमें यह संदेश देता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, हमें साहस और विश्वास नहीं छोड़ना चाहिए।


हनुमान जी की तरह अपनी क्षमता का उपयोग अच्छे कार्यों के लिए करना चाहिए और सफलता मिलने पर भी विनम्र बने रहना चाहिए।


उनका जीवन हमें बताता है कि सच्ची शक्ति वही है जिसका उपयोग धर्म, सेवा और दूसरों की भलाई के लिए किया जाए।


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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


हनुमान स्तोत्र क्या है?


हनुमान स्तोत्र भगवान हनुमान जी को समर्पित एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है, जिसमें उनके जन्म, शक्ति, वीरता और भगवान श्रीराम के प्रति उनके समर्पण का वर्णन किया गया है।


हनुमान स्तोत्र कब पढ़ना चाहिए?


हनुमान स्तोत्र का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है। मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ विशेष श्रद्धा से किया जाता है।


क्या हनुमान स्तोत्र का पाठ रोज कर सकते हैं?


हाँ, श्रद्धालु अपनी सुविधा और विश्वास के अनुसार हनुमान स्तोत्र का नियमित पाठ कर सकते हैं।


हनुमान स्तोत्र पढ़ने से क्या लाभ होता है?


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान स्तोत्र का पाठ साहस, आत्मविश्वास, सकारात्मकता और भक्ति की भावना को बढ़ाने में सहायक माना जाता है।


हनुमान जी किसके परम भक्त हैं?


हनुमान जी भगवान श्रीराम के परम भक्त माने जाते हैं। उनका पूरा जीवन श्रीराम की सेवा और भक्ति को समर्पित था।


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निष्कर्ष


श्री हनुमान स्तोत्रम् भगवान हनुमान जी की शक्ति, वीरता, साहस और भगवान श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति का सुंदर स्मरण है।


इस स्तोत्र के माध्यम से भक्त हनुमान जी के महान चरित्र का स्मरण करता है और उनके जीवन से साहस, सेवा, भक्ति और विनम्रता की प्रेरणा लेता है।


श्रद्धा और सकारात्मक भाव से हनुमान जी का स्मरण मन को शांति और कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का साहस प्रदान करने वाली आध्यात्मिक साधना बन सकता है।


॥ श्री हनुमते नमः ॥


॥ जय श्री राम ॥


॥ जय बजरंगबली ॥

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